श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

व्रतान्ते कार्तिके मासि त्रिरात्रं समुपोषितः।

स्नातः कदाचित् कालिन्द्यां हरिं मधुवनेऽर्चयत्॥ ३०

vratānte kārtike māsi trirātraṃ samupoṣitaḥ|

snātaḥ kadācit kālindyāṃ hariṃ madhuvane'rcayat|| 30

अर्थ

व्रतकी समाप्ति होनेपर कार्तिक महीनेमें उन्होंने तीन रातका उपवास किया और एक दिन यमुनाजीमें स्नान करके मधुवनमें भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की॥ ३०॥✎ 1633

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1633 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-भाग्यवान् → महाभाग्यवान्

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