जब ब्रह्माजीने इस प्रकार दुर्वासाको निराश कर दिया, तब भगवान्के चक्रसे संतप्त होकर वे कैलासवासी भगवान् शंकरकी शरणमें गये॥ ५५॥✎ 877
प्रत्याख्यातो विरिंचेन विष्णुचक्रोपतापितः।
दुर्वासाः शरणं यातः शर्वं कैलासवासिनम्॥ ५५
जब ब्रह्माजीने इस प्रकार दुर्वासाको निराश कर दिया, तब भगवान्के चक्रसे संतप्त होकर वे कैलासवासी भगवान् शंकरकी शरणमें गये॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 25) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/55/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)