श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.5.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

राजा तमकृताहारः प्रत्यागमनकाङ्क्षया।

चरणावुपसंगृह्य प्रसाद्य समभोजयत्॥ १८

rājā tamakṛtāhāraḥ pratyāgamanakāṅkṣayā|

caraṇāvupasaṃgṛhya prasādya samabhojayat|| 18

अर्थ

परीक्षित्! जबसे दुर्वासाजी भागे थे, तबसे अबतक राजा अम्बरीषने भोजन नहीं किया था। वे उनके लौटनेकी बाट देख रहे थे। अब उन्होंने दुर्वासाजीके चरण पकड़ लिये और उन्हें प्रसन्‍न करके विधिपूर्वक भोजन कराया॥ १८॥

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