॥ श्रीहरिः ॥
कर्मावदातमेतत् ते गायन्ति स्वःस्त्रियो मुहुः।
कीर्तिं२ परमपुण्यां च कीर्तयिष्यति भूरियम्॥ २१
karmāvadātametat te gāyanti svaḥstriyo muhuḥ|
kīrtiṃ paramapuṇyāṃ ca kīrtayiṣyati bhūriyam|| 21
अर्थ
स्वर्गकी देवांगनाएँ बार-बार आपके इस उज्ज्वल चरित्रका गान करेंगी। यह पृथ्वी भी आपकी परम पुण्यमयी कीर्तिका संकीर्तन करती रहेगी’॥ २१॥
कर्मावदातमेतत् ते गायन्ति स्वःस्त्रियो मुहुः।
कीर्तिं परमपुण्यां च कीर्तयिष्यति भूरियम्॥ २१
स्वर्गकी देवांगनाएँ बार-बार आपके इस उज्ज्वल चरित्रका गान करेंगी। यह पृथ्वी भी आपकी परम पुण्यमयी कीर्तिका संकीर्तन करती रहेगी’॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.5.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 30) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/5/21/टिप्पणियाँ
- २
कीर्तिं तां परमां पुण्यां कीर्त०।
(मुद्रित पृष्ठ 30)