श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.5.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

कर्मावदातमेतत् ते गायन्ति स्वःस्त्रियो मुहुः।

कीर्तिं२ परमपुण्यां च कीर्तयिष्यति भूरियम्॥ २१

karmāvadātametat te gāyanti svaḥstriyo muhuḥ|

kīrtiṃ paramapuṇyāṃ ca kīrtayiṣyati bhūriyam|| 21

अर्थ

स्वर्गकी देवांगनाएँ बार-बार आपके इस उज्ज्वल चरित्रका गान करेंगी। यह पृथ्वी भी आपकी परम पुण्यमयी कीर्तिका संकीर्तन करती रहेगी’॥ २१॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    कीर्तिं तां परमां पुण्यां कीर्त०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 30)

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