श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.16

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तेजसाऽऽप्यायितो विष्णोः पुरुषस्य परात्मनः।

प्रतीच्यां दिशि दैत्यानां न्यरुणत् त्रिदशैः पुरम्॥ १६

tejasā''pyāyito viṣṇoḥ puruṣasya parātmanaḥ|

pratīcyāṃ diśi daityānāṃ nyaruṇat tridaśaiḥ puram|| 16

अर्थ

सर्वान्तर्यामी भगवान् विष्णुने अपनी शक्तिसे पुरंजयको भर दिया। उन्होंने कवच पहनकर दिव्य धनुष और तीखे बाण ग्रहण किये। इसके बाद बैलपर चढ़कर वे उसके ककुद् (डील)-के पास बैठ गये। जब इस प्रकार वे युद्धके लिये तत्पर हुए तब देवता उनकी स्तुति करने लगे। देवताओंको साथ लेकर उन्होंने पश्‍चिमकी ओरसे दैत्योंका नगर घेर लिया॥ १५-१६॥

यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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