श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

रथीतरस्याप्रजस्य भार्यायां तन्तवेऽर्थितः।

अंगिरा जनयामास ब्रह्मवर्चस्विनः सुतान्॥ २

rathītarasyāprajasya bhāryāyāṃ tantave'rthitaḥ|

aṃgirā janayāmāsa brahmavarcasvinaḥ sutān|| 2

अर्थ

रथीतर सन्तानहीन था। वंश परम्पराकी रक्षाके लिये उसने अंगिरा ऋषिसे प्रार्थना की, उन्होंने उसकी पत्‍नीसे ब्रह्मतेजसे सम्पन्‍न कई पुत्र उत्पन्‍न किये॥ २॥

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