श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यः प्रियार्थमुतंकस्य धुन्धुनामासुरं बली।

सुतानामेकविंशत्या सहस्रैरहनद् वृतः॥ २२

yaḥ priyārthamutaṃkasya dhundhunāmāsuraṃ balī|

sutānāmekaviṃśatyā sahasrairahanad vṛtaḥ|| 22

अर्थ

ये बड़े बली थे। इन्होंने उतंक ऋषिको प्रसन्‍न करनेके लिये अपने इक्कीस हजार पुत्रोंको साथ लेकर धुन्धु नामक दैत्यका वध किया॥ २२॥

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