ये बड़े बली थे। इन्होंने उतंक ऋषिको प्रसन्न करनेके लिये अपने इक्कीस हजार पुत्रोंको साथ लेकर धुन्धु नामक दैत्यका वध किया॥ २२॥
यः प्रियार्थमुतंकस्य धुन्धुनामासुरं बली।
सुतानामेकविंशत्या सहस्रैरहनद् वृतः॥ २२
ये बड़े बली थे। इन्होंने उतंक ऋषिको प्रसन्न करनेके लिये अपने इक्कीस हजार पुत्रोंको साथ लेकर धुन्धु नामक दैत्यका वध किया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 34) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/6/22/