श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.39

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यमुनान्तर्जले म‌ग्‍नस्तप्यमानः परंतपः।

निर्वृतिं मीनराजस्य वीक्ष्य मैथुनधर्मिणः॥ ३९

yamunāntarjale magnastapyamānaḥ paraṃtapaḥ|

nirvṛtiṃ mīnarājasya vīkṣya maithunadharmiṇaḥ|| 39

अर्थ

परम तपस्वी सौभरिजी एक बार यमुनाजलमें डुबकी लगाकर तपस्या कर रहे थे। वहाँ उन्होंने देखा कि एक मत्स्यराज अपनी पत्‍नियोंके साथ बहुत सुखी हो रहा है॥ ३९॥

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