श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.49

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स कदाचिदुपासीन आत्मापह्नवमात्मनः।

ददर्श बह्वृचाचार्यो मीनसंगसमुत्थितम्॥ ४९

sa kadācidupāsīna ātmāpahnavamātmanaḥ|

dadarśa bahvṛcācāryo mīnasaṃgasamutthitam|| 49

अर्थ

ऋग्वेदाचार्य सौभरिजी एक दिन स्वस्थ चित्तसे बैठे हुए थे। उस समय उन्होंने देखा कि मत्स्यराजके क्षणभरके संगसे मैं किस प्रकार अपनी तपस्या तथा अपना आपातक खो बैठा॥ ४९॥

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