कुछ दिनके बाद उसे मालूम हुआ कि वरुणदेवताने रुष्ट होकर मेरे पिताजीपर आक्रमण किया है—जिसके कारण वे महोदर रोगसे पीड़ित हो रहे हैं, तब रोहित अपने नगरकी ओर चल पड़ा। परन्तु इन्द्रने आकर उसे रोक दिया॥ १७॥✎ 16372046
पितरं वरुणग्रस्तं श्रुत्वा जातमहोदरम्।
रोहितो ग्राममेयाय तमिन्द्रः प्रत्यषेधत॥ १७
कुछ दिनके बाद उसे मालूम हुआ कि वरुणदेवताने रुष्ट होकर मेरे पिताजीपर आक्रमण किया है—जिसके कारण वे महोदर रोगसे पीड़ित हो रहे हैं, तब रोहित अपने नगरकी ओर चल पड़ा। परन्तु इन्द्रने आकर उसे रोक दिया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 40) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/7/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)