श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

एवंवृत्तः परित्यक्तः पित्रा स्नेहमपोह्य वै।

योगैश्‍वर्येण बालांस्तान् दर्शयित्वा ततो ययौ॥ १८

evaṃvṛttaḥ parityaktaḥ pitrā snehamapohya vai|

yogaiśvaryeṇa bālāṃstān darśayitvā tato yayau|| 18

अर्थ

अन्तमें उनकी ऐसी करतूत देखकर पिताने पुत्र-स्नेहको तिलांजलि दे दी और उन्हें त्याग दिया। तदनन्तर असमंजसने अपने योगबलसे उन सब बालकोंको जीवित कर दिया और अपने पिताको दिखाकर वे वनमें चले गये॥ १८॥

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