श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तं परिक्रम्य शिरसा प्रसाद्य हयमानयत्।

सगरस्तेन पशुना क्रतुशेषं समापयत्॥ ३०

taṃ parikramya śirasā prasādya hayamānayat|

sagarastena paśunā kratuśeṣaṃ samāpayat|| 30

अर्थ

अंशुमान्‍ने बड़ी नम्रतासे उन्हें प्रसन्‍न करके उनकी परिक्रमा की और वे घोड़ेको ले आये। सगरने उस यज्ञपशुके द्वारा यज्ञकी शेष क्रिया समाप्त की॥ ३०॥

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