श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.3

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

नैमिषे सूतमासीनमभिवाद्य महामतिम्।

कथामृतरसास्वादकुशलः शौनकोऽब्रवीत्॥ ३

naimiṣe sūtamāsīnamabhivādya mahāmatim|

kathāmṛtarasāsvādakuśalaḥ śaunako'bravīt|| 3

अर्थ

एक बार भगवत्कथामृतका रसास्वादन करनेमें कुशल मुनिवर शौनकजीने नैमिषारण्य क्षेत्रमें विराजमान महामति सूतजीको नमस्कार करके उनसे पूछा॥ ३॥

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