महात्माओंके आश्रम, तीर्थ और नदियोंपर यवनों (विधर्मियों) का अधिकार हो गया है; उन दुष्टोंने बहुत-से देवालय भी नष्ट कर दिये हैं॥ ३४॥✎ 1562
आश्रमा यवनै रुद्धास्तीर्थानि सरितस्तथा।
देवतायतनान्यत्र दुष्टैर्नष्टानि भूरिशः॥ ३४
महात्माओंके आश्रम, तीर्थ और नदियोंपर यवनों (विधर्मियों) का अधिकार हो गया है; उन दुष्टोंने बहुत-से देवालय भी नष्ट कर दिये हैं॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 36) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)