श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.38

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तत्राश्‍चर्यं मया दृष्टं श्रूयतां तन्मुनीश्‍वराः।

एका तु तरुणी तत्र निषण्णा खिन्‍नमानसा॥ ३८

tatrāścaryaṃ mayā dṛṣṭaṃ śrūyatāṃ tanmunīśvarāḥ|

ekā tu taruṇī tatra niṣaṇṇā khinnamānasā|| 38

अर्थ

मुनिवरो! सुनिये, वहाँ मैंने एक बड़ा आश्‍चर्य देखा। वहाँ एक युवती स्त्री खिन्‍न मनसे बैठी थी॥ ३८॥✎ 1954

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1954 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दशों → दसों

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