युवतीने कहा—मेरा नाम भक्ति है, ये ज्ञान और वैराग्य नामक मेरे पुत्र हैं। समयके फेरसे ही ये ऐसे जर्जर हो गये हैं॥ ४५॥
अहं भक्तिरिति ख्याता इमौ मे तनयौ मतौ।
ज्ञानवैराग्यनामानौ कालयोगेन जर्जरौ॥ ४५
युवतीने कहा—मेरा नाम भक्ति है, ये ज्ञान और वैराग्य नामक मेरे पुत्र हैं। समयके फेरसे ही ये ऐसे जर्जर हो गये हैं॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 37) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/45/