भक्ति, ज्ञान और वैराग्यसे प्राप्त होनेवाले महान् विवेककी वृद्धि किस प्रकार होती है तथा वैष्णवलोग किस तरह इस माया-मोहसे अपना पीछा छुड़ाते हैं?॥ ५॥✎ 15601561
भक्तिज्ञानविरागाप्तो विवेको वर्धते महान्।
मायामोहनिरासश्च वैष्णवैः क्रियते कथम्॥ ५
भक्ति, ज्ञान और वैराग्यसे प्राप्त होनेवाले महान् विवेककी वृद्धि किस प्रकार होती है तथा वैष्णवलोग किस तरह इस माया-मोहसे अपना पीछा छुड़ाते हैं?॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 33) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)