मनपर काबू न होनेके कारण तथा लोभ, दम्भ और पाखण्डका आश्रय लेनेके कारण एवं शास्त्रका अभ्यास न करनेसे ध्यानयोगका फल मिट गया॥ ७४॥
मनसश्चाजयाल्लोभाद्दम्भात्पाखण्डसंश्रयात्।
शास्त्रानभ्यसनाच्चैव ध्यानयोगफलं गतम्॥ ७४
मनपर काबू न होनेके कारण तथा लोभ, दम्भ और पाखण्डका आश्रय लेनेके कारण एवं शास्त्रका अभ्यास न करनेसे ध्यानयोगका फल मिट गया॥ ७४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.74 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 39) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/74/