इसी समय उन्हें अपने सामने करोड़ों सूर्योंके समान तेजस्वी सनकादि मुनीश्वर दिखायी दिये। उन्हें देखकर वे मुनिश्रेष्ठ कहने लगे॥ ४४॥
तावद्ददर्श पुरतः सनकादीन्मुनीश्वरान्।
कोटिसूर्यसमाभासानुवाच मुनिसत्तमः॥ ४४
इसी समय उन्हें अपने सामने करोड़ों सूर्योंके समान तेजस्वी सनकादि मुनीश्वर दिखायी दिये। उन्हें देखकर वे मुनिश्रेष्ठ कहने लगे॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 44) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/44/