श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.44

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तावद्ददर्श पुरतः सनकादीन्मुनीश्‍वरान्।

कोटिसूर्यसमाभासानुवाच मुनिसत्तमः॥ ४४

tāvaddadarśa purataḥ sanakādīnmunīśvarān|

koṭisūryasamābhāsānuvāca munisattamaḥ|| 44

अर्थ

इसी समय उन्हें अपने सामने करोड़ों सूर्योंके समान तेजस्वी सनकादि मुनीश्‍वर दिखायी दिये। उन्हें देखकर वे मुनिश्रेष्ठ कहने लगे॥ ४४॥

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