॥ श्रीहरिः ॥
इति निश्चित्य चिद्रूपः सद्रूपां त्वां ससर्ज ह।
परमानन्दचिन्मूर्तिः सुन्दरीं कृष्णवल्लभाम्॥ ५
iti niścitya cidrūpaḥ sadrūpāṃ tvāṃ sasarja ha|
paramānandacinmūrtiḥ sundarīṃ kṛṣṇavallabhām|| 5
अर्थ
यह सोचकर ही परमानन्दचिन्मूर्ति ज्ञानस्वरूप श्रीहरिने अपने सत्स्वरूपसे तुम्हें रचा है; तुम साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्रकी प्रिया और परम सुन्दरी हो॥ ५॥✎ 9 10
इति निश्चित्य चिद्रूपः सद्रूपां त्वां ससर्ज ह।
परमानन्दचिन्मूर्तिः सुन्दरीं कृष्णवल्लभाम्॥ ५
यह सोचकर ही परमानन्दचिन्मूर्ति ज्ञानस्वरूप श्रीहरिने अपने सत्स्वरूपसे तुम्हें रचा है; तुम साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्रकी प्रिया और परम सुन्दरी हो॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 40) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #9 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #10 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्ने