॥ श्रीहरिः ॥
विमानानि समारुह्य कियन्तो देवनायकाः।
कल्पवृक्षप्रसूनैस्तान् सर्वांस्तत्र समाकिरन्॥ २२
vimānāni samāruhya kiyanto devanāyakāḥ|
kalpavṛkṣaprasūnaistān sarvāṃstatra samākiran|| 22
अर्थ
कोई-कोई देवश्रेष्ठ तो विमानोंपर चढ़कर वहाँ बैठे हुए सब लोगोंपर कल्पवृक्षके पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ २२॥
विमानानि समारुह्य कियन्तो देवनायकाः।
कल्पवृक्षप्रसूनैस्तान् सर्वांस्तत्र समाकिरन्॥ २२
कोई-कोई देवश्रेष्ठ तो विमानोंपर चढ़कर वहाँ बैठे हुए सब लोगोंपर कल्पवृक्षके पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 49) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/22/