श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.37

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यश्‍च भागवतं शास्त्रं वाचयेदर्थतोऽनिशम्।

जन्मकोटिकृतं पापं नश्यते नात्र संशयः॥ ३७

yaśca bhāgavataṃ śāstraṃ vācayedarthato'niśam|

janmakoṭikṛtaṃ pāpaṃ naśyate nātra saṃśayaḥ|| 37

अर्थ

जो पुरुष अहर्निश अर्थसहित श्रीमद्भागवतशास्त्रका पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मोंका पाप नष्ट हो जाता है—इसमें तनिक भी संदेह नहीं है॥ ३७॥

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