श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.59

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

त्वद्वियोगेन ते भक्ताः कथं स्थास्यन्ति भूतले।

निर्गुणोपासने कष्टमतः किञ्चिद्विचारय॥ ५९

tvadviyogena te bhaktāḥ kathaṃ sthāsyanti bhūtale|

nirguṇopāsane kaṣṭamataḥ kiñcidvicāraya|| 59

अर्थ

फिर भला, आपका वियोग होनेपर वे भक्तजन पृथ्वीपर कैसे रह सकेंगे? निर्गुणोपासनामें तो बड़ा कष्ट है। इसलिये कुछ और विचार कीजिये॥ ५९॥✎ 12

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #12 शब्दोंके बीचका स्थान: ५५॥अब → ५५॥ अब

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