श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.68

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तां चागतां भागवतार्थभूषां सुचारुवेषां ददृशुः सदस्याः।

कथं प्रविष्टा कथमागतेयं मध्ये मुनीनामिति तर्कयन्तः॥ ६८

tāṃ cāgatāṃ bhāgavatārthabhūṣāṃ sucāruveṣāṃ dadṛśuḥ sadasyāḥ|

kathaṃ praviṣṭā kathamāgateyaṃ madhye munīnāmiti tarkayantaḥ|| 68

अर्थ

सभी सदस्योंने देखा कि परम सुन्दरी भक्तिरानी भागवतके अर्थोंका आभूषण पहने वहाँ पधारीं। मुनियोंकी उस सभामें सभी यह तर्क-वितर्क करने लगे कि ये यहाँ कैसे आयीं, कैसे प्रविष्ट हुईं॥ ६८॥

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