सभी सदस्योंने देखा कि परम सुन्दरी भक्तिरानी भागवतके अर्थोंका आभूषण पहने वहाँ पधारीं। मुनियोंकी उस सभामें सभी यह तर्क-वितर्क करने लगे कि ये यहाँ कैसे आयीं, कैसे प्रविष्ट हुईं॥ ६८॥
तां चागतां भागवतार्थभूषां सुचारुवेषां ददृशुः सदस्याः।
कथं प्रविष्टा कथमागतेयं मध्ये मुनीनामिति तर्कयन्तः॥ ६८
सभी सदस्योंने देखा कि परम सुन्दरी भक्तिरानी भागवतके अर्थोंका आभूषण पहने वहाँ पधारीं। मुनियोंकी उस सभामें सभी यह तर्क-वितर्क करने लगे कि ये यहाँ कैसे आयीं, कैसे प्रविष्ट हुईं॥ ६८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.68 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 53) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/3/68/