भक्ति भी अपनी आँखोंके ही सामने निर्बल और जराजीर्ण अवस्थामें पड़े हुए ज्ञान और वैराग्यको साथ लेकर वहाँ आ जायगी॥ ८॥
पुरःस्थं निर्बलं चैव जराजीर्णकलेवरम्।
तद्द्वयं च पुरस्कृत्य भक्तिस्तत्रागमिष्यति॥ ८
भक्ति भी अपनी आँखोंके ही सामने निर्बल और जराजीर्ण अवस्थामें पड़े हुए ज्ञान और वैराग्यको साथ लेकर वहाँ आ जायगी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 48) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/8/