वह धनी होनेपर भी भिक्षाजीवी था। उसकी प्यारी पत्नी धुन्धुली कुलीन एवं सुन्दरी होनेपर भी सदा अपनी बातपर अड़ जानेवाली थी॥ १८॥
भिक्षुको वित्तवाल्ँलोके तत्प्रिया धुन्धुली स्मृता।
स्ववाक्यस्थापिका नित्यं सुन्दरी सुकुलोद्भवा॥ १८
वह धनी होनेपर भी भिक्षाजीवी था। उसकी प्यारी पत्नी धुन्धुली कुलीन एवं सुन्दरी होनेपर भी सदा अपनी बातपर अड़ जानेवाली थी॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 55) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/4/18/