श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.20

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एवं निवसतोः प्रेम्णा दम्पत्यो रममाणयोः।

अर्थाः कामास्तयोरासन्‍न सुखाय गृहादिकम्॥ २०

evaṃ nivasatoḥ premṇā dampatyo ramamāṇayoḥ|

arthāḥ kāmāstayorāsanna sukhāya gṛhādikam|| 20

अर्थ

इस प्रकार ब्राह्मण दम्पति प्रेमसे अपने घरमें रहते और विहार करते थे। उनके पास अर्थ और भोग-विलासकी सामग्री बहुत थी। घर-द्वार भी सुन्दर थे, परन्तु उससे उन्हें सुख नहीं था॥ २०॥

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