श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.47

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तिर्यक्चेदागतो गर्भस्तदा मे मरणं भवेत्।

प्रसूतौ दारुणं दुःखं सुकुमारी कथं सहे॥ ४७

tiryakcedāgato garbhastadā me maraṇaṃ bhavet|

prasūtau dāruṇaṃ duḥkhaṃ sukumārī kathaṃ sahe|| 47

अर्थ

और कहीं प्रसवकालके समय वह टेढ़ा हो गया तो फिर प्राणोंसे ही हाथ धोना पड़ेगा। यों भी प्रसवके समय बड़ी भयंकर पीड़ा होती है; मैं सुकुमारी भला, यह सब कैसे सह सकूँगी?॥ ४७॥

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