श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.55

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

फलमर्पय धेन्वै त्वं परीक्षार्थं तु साम्प्रतम्।

तत्तदाचरितं सर्वं तथैव स्त्रीस्वभावतः॥ ५५

phalamarpaya dhenvai tvaṃ parīkṣārthaṃ tu sāmpratam|

tattadācaritaṃ sarvaṃ tathaiva strīsvabhāvataḥ|| 55

अर्थ

तू इस समय इसकी जाँच करनेके लिये यह फल गौको खिला दे।’ ब्राह्मणीने स्त्रीस्वभाववश जो-जो उसकी बहिनने कहा था, वैसे ही सब किया॥ ५५॥✎ 1569

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1569 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गुप्त-रूपसे → गुप्तरूपसे

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