hṛdayaṃ kṣuradhārābhaṃ priyaḥ ko nāma yoṣitām|| 15
अर्थ
इनकी वाणी तो अमृतके समान कामियोंके हृदयमें रसका संचार करती है; किन्तु हृदय छूरेकी धारके समान तीक्ष्ण होता है। भला, इन स्त्रियोंका कौन प्यारा है?॥ १५॥
सुधामयं वचो यासां कामिनां रसवर्धनम्।
हृदयं क्षुरधाराभं प्रियः को नाम योषिताम्॥ १५
इनकी वाणी तो अमृतके समान कामियोंके हृदयमें रसका संचार करती है; किन्तु हृदय छूरेकी धारके समान तीक्ष्ण होता है। भला, इन स्त्रियोंका कौन प्यारा है?॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 63) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/5/15/