श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.26

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ततोऽञ्जलौ जलं कृत्वा गोकर्णस्तमुदैरयत्।

तत्सेकहतपापोऽसौ प्रवक्तुमुपचक्रमे॥ २६

tato'ñjalau jalaṃ kṛtvā gokarṇastamudairayat|

tatsekahatapāpo'sau pravaktumupacakrame|| 26

अर्थ

तब गोकर्णने अंजलिमें जल लेकर उसे अभिमन्त्रित करके उसपर छिड़का। इससे उसके पापोंका कुछ शमन हुआ और वह इस प्रकार कहने लगा॥ २६॥

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