श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.32

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

गयाश्राद्धान्‍न मुक्तिश्चेदुपायो नापरस्त्विह।

किं विधेयं मया प्रेत तत्त्वं वद सविस्तरम्॥ ३२

gayāśrāddhānna muktiścedupāyo nāparastviha|

kiṃ vidheyaṃ mayā preta tattvaṃ vada savistaram|| 32

अर्थ

यदि गया-श्राद्धसे भी तुम्हारी मुक्ति नहीं हुई, तब इसका और कोई उपाय ही नहीं है। अच्छा, तुम सब बात खोलकर कहो—मुझे अब क्या करना चाहिये?॥ ३२॥

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