श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.35

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इदानीं तु निजं स्थानमातिष्ठ प्रेत निर्भयः।

त्वन्मुक्तिसाधकं किञ्चिदाचरिष्ये विचार्य च॥ ३५

idānīṃ tu nijaṃ sthānamātiṣṭha preta nirbhayaḥ|

tvanmuktisādhakaṃ kiñcidācariṣye vicārya ca|| 35

अर्थ

अच्छा, अभी तो तुम निर्भय होकर अपने स्थानपर रहो; मैं विचार करके तुम्हारी मुक्तिके लिये कोई दूसरा उपाय करूँगा’॥ ३५॥

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