अच्छा, अभी तो तुम निर्भय होकर अपने स्थानपर रहो; मैं विचार करके तुम्हारी मुक्तिके लिये कोई दूसरा उपाय करूँगा’॥ ३५॥
इदानीं तु निजं स्थानमातिष्ठ प्रेत निर्भयः।
त्वन्मुक्तिसाधकं किञ्चिदाचरिष्ये विचार्य च॥ ३५
अच्छा, अभी तो तुम निर्भय होकर अपने स्थानपर रहो; मैं विचार करके तुम्हारी मुक्तिके लिये कोई दूसरा उपाय करूँगा’॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 65) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/35/