tatsarvaṃ kathitaṃ tena yajjātaṃ ca yathā niśi|| 37
अर्थ
प्रातःकाल उनको आया देख लोग प्रेमसे उनसे मिलने आये। तब गोकर्णने रातमें जो कुछ जिस प्रकार हुआ था, वह सब उन्हें सुना दिया॥ ३७॥✎ 16
प्रातस्तमागतं दृष्ट्वा लोकाः प्रीत्या समागताः।
तत्सर्वं कथितं तेन यज्जातं च यथा निशि॥ ३७
प्रातःकाल उनको आया देख लोग प्रेमसे उनसे मिलने आये। तब गोकर्णने रातमें जो कुछ जिस प्रकार हुआ था, वह सब उन्हें सुना दिया॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 65) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)