श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.52

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ननाम भ्रातरं सद्यो गोकर्णमिति चाब्रवीत्।

त्वयाहं मोचितो बन्धो कृपया प्रेतकश्मलात्॥ ५२

nanāma bhrātaraṃ sadyo gokarṇamiti cābravīt|

tvayāhaṃ mocito bandho kṛpayā pretakaśmalāt|| 52

अर्थ

उसने तुरन्त अपने भाई गोकर्णको प्रणाम करके कहा—‘भाई! तुमने कृपा करके मुझे प्रेतयोनिकी यातनाओंसे मुक्त कर दिया॥ ५२॥

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