राजा यह सारा धन छीनकर इसे निश्चय ही प्राणदण्ड देगा। जब एक दिन इसे मरना ही है, तब हम ही धनकी रक्षाके लिये गुप्तरूपसे इसको क्यों न मार डालें॥ ८॥
वित्तं हृत्वा पुनश्चैनं मारयिष्यति निश्चितम्।
अतोऽर्थगुप्तये गूढमस्माभिः किं न हन्यते॥ ८
राजा यह सारा धन छीनकर इसे निश्चय ही प्राणदण्ड देगा। जब एक दिन इसे मरना ही है, तब हम ही धनकी रक्षाके लिये गुप्तरूपसे इसको क्यों न मार डालें॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 63) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/5/8/