इस प्रकार विनयपूर्वक उन्हें निमन्त्रित करे और जो लोग आयें, उनके लिये यथोचित निवास-स्थानका प्रबन्ध करे॥ ११॥✎ 1270
एवमाकारणं तेषां कर्तव्यं विनयेन च।
आगन्तुकानां सर्वेषां वासस्थानानि कल्पयेत्॥ ११
इस प्रकार विनयपूर्वक उन्हें निमन्त्रित करे और जो लोग आयें, उनके लिये यथोचित निवास-स्थानका प्रबन्ध करे॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 71) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी