श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.51

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

दरिद्रश्‍च क्षयी रोगी निर्भाग्यः पापकर्मवान्।

अनपत्यो मोक्षकामः शृणुयाच्च कथामिमाम्॥ ५१

daridraśca kṣayī rogī nirbhāgyaḥ pāpakarmavān|

anapatyo mokṣakāmaḥ śṛṇuyācca kathāmimām|| 51

अर्थ

धनहीन, क्षयरोगी, किसी अन्य रोगसे पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मुमुक्षु भी यह कथा श्रवण करे॥ ५१॥

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