इस प्रकार जब सप्ताहयज्ञ समाप्त हो जाय, तब श्रोताओंको अत्यन्त भक्तिपूर्वक पुस्तक और वक्ताकी पूजा करनी चाहिये॥ ५६॥
एवं नगाहयज्ञेऽस्मिन् समाप्ते श्रोतृभिस्तदा।
पुस्तकस्य च वक्तुश्च पूजा कार्यातिभक्तितः॥ ५६
इस प्रकार जब सप्ताहयज्ञ समाप्त हो जाय, तब श्रोताओंको अत्यन्त भक्तिपूर्वक पुस्तक और वक्ताकी पूजा करनी चाहिये॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 75) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/56/