श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.64

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

द्वादश ब्राह्मणान् पश्चाद्भोजयेन्मधुपायसैः।

दद्यात्सुवर्णं धेनुं च व्रतपूर्णत्वहेतवे॥ ६४

dvādaśa brāhmaṇān paścādbhojayenmadhupāyasaiḥ|

dadyātsuvarṇaṃ dhenuṃ ca vratapūrṇatvahetave|| 64

अर्थ

फिर बारह ब्राह्मणोंको खीर और मधु आदि उत्तम-उत्तम पदार्थ खिलाये तथा व्रतकी पूर्तिके लिये गौ और सुवर्णका दान करे॥ ६४॥

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