तुम्हें अपने खजानेकी, सेनाकी तथा शत्रुओंको दबाने आदिकी तनिक भी चिन्ता न करनी चाहिये। तुम्हारे लिये कोई कर्तव्य है तो केवल एक ही; वह यह कि तुम्हें अपनी इन माताओंकी खूब प्रेमसे भलीभाँति सेवा करते रहना चाहिये॥ ११॥
कोशसैन्यादिजा चिन्ता तथारिदमनादिजा।
मनागपि न कार्या ते सुसेव्याः किन्तु मातरः॥ ११
तुम्हें अपने खजानेकी, सेनाकी तथा शत्रुओंको दबाने आदिकी तनिक भी चिन्ता न करनी चाहिये। तुम्हारे लिये कोई कर्तव्य है तो केवल एक ही; वह यह कि तुम्हें अपनी इन माताओंकी खूब प्रेमसे भलीभाँति सेवा करते रहना चाहिये॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 984) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/1/11/