आद्यां विना द्वितीया न द्वितीया नाद्यगा क्वचित्॥ २६
vāstavī tatsvasaṃvedyā jīvānāṃ vyāvahārikī|
ādyāṃ vinā dvitīyā na dvitīyā nādyagā kvacit|| 26
अर्थ
वास्तवी लीला स्वसंवेद्य है—उसे स्वयं भगवान् और उनके रसिक भक्तजन ही जानते हैं। जीवोंके सामने जो लीला होती है, वह व्यावहारिकी लीला है। वास्तवी लीलाके बिना व्यावहारिकी लीला नहीं हो सकती; परन्तु व्यावहारिकी लीलाका वास्तविक लीलाके राज्यमें कभी प्रवेश नहीं हो सकता॥ २६॥
वास्तवी तत्स्वसंवेद्या जीवानां व्यावहारिकी।
आद्यां विना द्वितीया न द्वितीया नाद्यगा क्वचित्॥ २६
वास्तवी लीला स्वसंवेद्य है—उसे स्वयं भगवान् और उनके रसिक भक्तजन ही जानते हैं। जीवोंके सामने जो लीला होती है, वह व्यावहारिकी लीला है। वास्तवी लीलाके बिना व्यावहारिकी लीला नहीं हो सकती; परन्तु व्यावहारिकी लीलाका वास्तविक लीलाके राज्यमें कभी प्रवेश नहीं हो सकता॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 986) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/26/