यमुना और श्रीकृष्णपत्नियोंका संवाद, कीर्तनोत्सवमें उद्धवजीका प्रकट होना
ऋषय ऊचुः
शाण्डिल्ये तौ समादिश्य परावृत्ते स्वमाश्रमम्।
किं कथं चक्रतुस्तौ तु राजानौ सूत तद् वद॥ १
śāṇḍilye tau samādiśya parāvṛtte svamāśramam|
kiṃ kathaṃ cakratustau tu rājānau sūta tad vada|| 1
अर्थ
ऋषियोंने पूछा—सूतजी! अब यह बतलाइये कि परीक्षित् और वज्रनाभको इस प्रकार आदेश देकर जब शाण्डिल्य मुनि अपने आश्रमको लौट गये, तब उन दोनों राजाओंने कैसे-कैसे और कौन-कौन-सा काम किया?॥ १॥
शाण्डिल्ये तौ समादिश्य परावृत्ते स्वमाश्रमम्।
किं कथं चक्रतुस्तौ तु राजानौ सूत तद् वद॥ १
ऋषियोंने पूछा—सूतजी! अब यह बतलाइये कि परीक्षित् और वज्रनाभको इस प्रकार आदेश देकर जब शाण्डिल्य मुनि अपने आश्रमको लौट गये, तब उन दोनों राजाओंने कैसे-कैसे और कौन-कौन-सा काम किया?॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 988) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/2/1/