श्रीकृष्ण ही राधा हैं और राधा ही श्रीकृष्ण हैं। उन दोनोंका प्रेम ही वंशी है। तथा राधाकी प्यारी सखी चन्द्रावली भी श्रीकृष्ण-चरणोंके नखरूपी चन्द्रमाओंकी सेवामें आसक्त रहनेके कारण ही ‘चन्द्रावली’ नामसे कही जाती है॥ १३॥
स एव सा स सैवास्ति वंशी तत्प्रेमरूपिका।
श्रीकृष्णनखचन्द्रालिसंगाच्चन्द्रावली स्मृता॥ १३
श्रीकृष्ण ही राधा हैं और राधा ही श्रीकृष्ण हैं। उन दोनोंका प्रेम ही वंशी है। तथा राधाकी प्यारी सखी चन्द्रावली भी श्रीकृष्ण-चरणोंके नखरूपी चन्द्रमाओंकी सेवामें आसक्त रहनेके कारण ही ‘चन्द्रावली’ नामसे कही जाती है॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 990) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/2/13/