श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.16

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

एवमेवात्र गोपीनामक्रूरावसरे पुरा।

विरहाभास एवासीदुद्धवेन समाहितः॥ १६

evamevātra gopīnāmakrūrāvasare purā|

virahābhāsa evāsīduddhavena samāhitaḥ|| 16

अर्थ

इसी प्रकार पहले भी जब अक्रूर श्रीकृष्णको नन्दगाँवसे मथुरामें ले आये थे, उस अवसरपर जो गोपियोंको श्रीकृष्णसे विरहकी प्रतीति हुई थी, वह भी वास्तविक विरह नहीं, केवल विरहका आभास था। इस बातको जबतक वे नहीं जानती थीं, तबतक उन्हें बड़ा कष्ट था; फिर जब उद्धवजीने आकर उनका समाधान किया, तब वे इस बातको समझ सकीं॥ १६॥

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