॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.2.24
गोवर्द्धनगिरिनिकटे सखीस्थले तद्रजःकामः।
तत्रत्यांकुरवल्लीरूपेणास्ते स उद्धवो नूनम्॥ २४
govarddhanagirinikaṭe sakhīsthale tadrajaḥkāmaḥ|
tatratyāṃkuravallīrūpeṇāste sa uddhavo nūnam|| 24
अर्थ
फिर भी एक स्थान है, जहाँ उद्धवजीका दर्शन हो सकता है। गोवर्धन पर्वतके निकट भगवान्की लीला-सहचरी गोपियोंकी विहार-स्थली है; वहाँकी लता, अंकुर और बेलोंके रूपमें अवश्य ही उद्धवजी वहाँ निवास करते हैं। लताओंके रूपमें उनके रहनेका यही उद्देश्य है कि भगवान्की प्रियतमा गोपियोंकी चरणरज उनपर पड़ती रहे॥ २४॥