सूतजी कहते हैं—यमुनाजीकी बतायी हुई बातें सुनकर श्रीकृष्णकी रानियाँ बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने यमुनाजीको प्रणाम किया और वहाँसे लौटकर वज्रनाभ तथा परीक्षित्से वे सारी बातें कह सुनायीं॥ २८॥✎ 14601461
इति श्रुत्वा प्रसन्नास्ताः कालिन्दीमभिवन्द्य तत्।
कथयामासुरागत्य वज्रं प्रति परीक्षितम्॥ २८
सूतजी कहते हैं—यमुनाजीकी बतायी हुई बातें सुनकर श्रीकृष्णकी रानियाँ बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने यमुनाजीको प्रणाम किया और वहाँसे लौटकर वज्रनाभ तथा परीक्षित्से वे सारी बातें कह सुनायीं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 992) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/2/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1460 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित्को → परीक्षित्को