श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.30

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

गोवर्द्धनाददूरेण वृन्दारण्ये सखीस्थले।

प्रवृत्तः कुसुमाम्भोधौ कृष्णसंकीर्तनोत्सवः॥ ३०

govarddhanādadūreṇa vṛndāraṇye sakhīsthale|

pravṛttaḥ kusumāmbhodhau kṛṣṇasaṃkīrtanotsavaḥ|| 30

अर्थ

गोवर्धनके निकट वृन्दावनके भीतर कुसुम-सरोवरपर जो सखियोंकी विहारस्थली है, वहाँ ही श्रीकृष्णकीर्तनका उत्सव आरम्भ हुआ॥ ३०॥

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