॥ श्रीहरिः ॥
गोवर्द्धनाददूरेण वृन्दारण्ये सखीस्थले।
प्रवृत्तः कुसुमाम्भोधौ कृष्णसंकीर्तनोत्सवः॥ ३०
govarddhanādadūreṇa vṛndāraṇye sakhīsthale|
pravṛttaḥ kusumāmbhodhau kṛṣṇasaṃkīrtanotsavaḥ|| 30
अर्थ
गोवर्धनके निकट वृन्दावनके भीतर कुसुम-सरोवरपर जो सखियोंकी विहारस्थली है, वहाँ ही श्रीकृष्णकीर्तनका उत्सव आरम्भ हुआ॥ ३०॥
गोवर्द्धनाददूरेण वृन्दारण्ये सखीस्थले।
प्रवृत्तः कुसुमाम्भोधौ कृष्णसंकीर्तनोत्सवः॥ ३०
गोवर्धनके निकट वृन्दावनके भीतर कुसुम-सरोवरपर जो सखियोंकी विहारस्थली है, वहाँ ही श्रीकृष्णकीर्तनका उत्सव आरम्भ हुआ॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 992) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/2/30/