भगवान्के भक्त जहाँ जब कभी श्रीमद्भागवत शास्त्रका कीर्तन और श्रवण करते हैं, वहाँ उस समय भगवान् श्रीकृष्ण साक्षात् रूपसे विराजमान रहते हैं॥ १२॥
श्रीमद्भागवतं शास्त्रं यत्र भागवतैर्यदा।
कीर्त्यते श्रूयते चापि श्रीकृष्णस्तत्र निश्चितम्॥ १२
भगवान्के भक्त जहाँ जब कभी श्रीमद्भागवत शास्त्रका कीर्तन और श्रवण करते हैं, वहाँ उस समय भगवान् श्रीकृष्ण साक्षात् रूपसे विराजमान रहते हैं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 995) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/12/