स्त्रियों तथा अन्त्यज आदि अन्य लोगोंकी भी इच्छा श्रीमद्भागवतसे पूर्ण होती है; अतः कौन ऐसा भाग्यवान् पुरुष है, जो श्रीमद्भागवतका नित्य ही सेवन न करेगा॥ १७॥
योषितामपरेषां च सर्ववांछितपूरणम्।
अतो भागवतं नित्यं को न सेवेत भाग्यवान्॥ १७
स्त्रियों तथा अन्त्यज आदि अन्य लोगोंकी भी इच्छा श्रीमद्भागवतसे पूर्ण होती है; अतः कौन ऐसा भाग्यवान् पुरुष है, जो श्रीमद्भागवतका नित्य ही सेवन न करेगा॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 995) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/17/